ॐ : हिंदू धर्म में पवित्र ध्वनि और एकत्व का प्रतीक

🌺 ॐ : पवित्र ध्वनि और एकत्व का प्रतीक

हिंदू धर्म की आध्यात्मिक परंपरा में ॐ (ओंकार) को सर्वोच्च और पवित्रतम ध्वनि माना गया है। यह केवल एक अक्षर या मंत्र नहीं है, बल्कि समस्त ब्रह्मांड की उत्पत्ति और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मांड की प्रथम ध्वनि ‘ॐ’ है, जिससे समस्त सृष्टि की रचना हुई।


📜 वेदों और उपनिषदों में ॐ

🕉️ मांडूक्य उपनिषद

मांडूक्य उपनिषद में कहा गया है:
“ॐ इत्येतदक्षरमिदं सर्वं तस्योपव्याख्यानं भूतं भवद्भविष्यदिति सर्वमोङ्कार एव।”
अर्थात् – यह ॐ अक्षर सम्पूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है। भूत, वर्तमान और भविष्य – सब ॐ में समाहित हैं।

🕉️ ऋग्वेद

ऋग्वेद में ‘ओंकार’ को यज्ञ और प्रार्थना का मूल कहा गया है। यज्ञ की शुरुआत और समापन दोनों ही ॐ से किए जाते थे।

🕉️ भगवद्गीता

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा:
“ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्॥” (गीता 8.13)

अर्थ – जो व्यक्ति मृत्यु के समय ‘ॐ’ का उच्चारण करते हुए परमात्मा को स्मरण करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।


🌟 ॐ का उच्चारण और स्वरूप

‘ॐ’ का उच्चारण तीन ध्वनियों – अ, उ, म – से मिलकर होता है।

  • = जाग्रत अवस्था (भौतिक चेतना)

  • = स्वप्न अवस्था (सुषुप्त चेतना)

  • = गहरी निद्रा अवस्था (अचेतन चेतना)
    और इन तीनों के पार की शांति (तुरीय अवस्था) ही परमात्मा का स्वरूप है।


⚡ ॐ का वैज्ञानिक महत्व

  • ॐ का जप करने से मन और मस्तिष्क शांत होता है।

  • इसकी ध्वनि तरंगें शरीर की कोशिकाओं में ऊर्जा भर देती हैं।

  • आधुनिक विज्ञान ने भी स्वीकार किया है कि ॐ का कंपन मस्तिष्क की अल्फा तरंगों को सक्रिय करता है, जिससे तनाव कम होता है और ध्यान गहरा होता है।


🕉️ ओंकार और योग

योग साधना में ॐ का विशेष महत्व है। ध्यान करते समय जब साधक ‘ॐ’ का जप करता है, तो उसका मन एकाग्र होकर परमात्मा की ओर उन्मुख होता है। पतंजलि योगसूत्र में कहा गया है:
“तस्य वाचकः प्रणवः”
अर्थ – ईश्वर का प्रत्यक्ष स्वरूप ‘ॐ’ है।


🔥 शास्त्रों से अन्य संदर्भ ()

  • छांदोग्य उपनिषद में कहा गया है कि “संपूर्ण ब्रह्मांड का सार ॐ है।”

  • श्वेताश्वतर उपनिषद में ॐ को “अविनाशी परम सत्य” कहा गया है।

  • अथर्ववेद में ॐ को “अनंत ध्वनि” बताया गया है।


🌺 दैनिक जीवन में ॐ

  1. मंदिरों में हर पूजा की शुरुआत ॐ से होती है।

  2. योग और ध्यान का आधार ‘ॐ’ मंत्र है।

  3. वैदिक मंत्रों और श्लोकों का प्रथम शब्द प्रायः ॐ होता है।

  4. ओम लिखना और उसका ध्यान करना मन को शुद्ध और संतुलित करता है।

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